Gratuity New Rules 2026: नए Labour Code के 9 बड़े बदलाव — Complete Hindi Guide

Gratuity New Rules 2026: नए Labour Code के 9 बड़े बदलाव — Complete Hindi Guide

अगर आप salaried employee हैं या छोटी company चलाते हैं, तो gratuity new rules आपके लिए सिर्फ़ एक खबर नहीं — सीधे पैसों का मामला है। 21 नवंबर 2025 से Code on Social Security, 2020 लागू हो चुका है और इसने 1972 के पुराने Payment of Gratuity Act की जगह ले ली है। इसका असर यह है कि fixed-term staff को अब सिर्फ़ 1 साल में gratuity मिल सकती है, और permanent employees की gratuity की रकम भी wages की नई definition की वजह से बढ़ सकती है।

दिक्कत यह है कि WhatsApp और YouTube पर आधा-अधूरा सच घूम रहा है — कोई कहता है सबको 1 साल में मिलेगी, कोई कहता है कुछ बदला ही नहीं। इस guide में हम gratuity new rules को कानून की भाषा से निकालकर आसान हिंदी में रखेंगे: कौन eligible है, रकम कैसे बनती है, कितनी tax-free है, और employer मना कर दे तो क्या करना है।

Gratuity क्या है और Gratuity New Rules क्यों ज़रूरी हो गए

Gratuity को समझने का सबसे सीधा तरीका यह है — यह आपकी salary का हिस्सा नहीं, बल्कि लंबी service पूरी करने पर मिलने वाली एकमुश्त रकम है। Employer इसे हर महीने नहीं देता। यह तब देय होती है जब आप नौकरी छोड़ते हैं, retire होते हैं, या दुर्भाग्य से service के दौरान मृत्यु या स्थायी अपंगता हो जाती है।

पचास साल से ज़्यादा तक यह व्यवस्था Payment of Gratuity Act, 1972 से चलती रही। उस दौर की सोच सीधी थी — एक आदमी, एक factory, तीस साल की नौकरी। लेकिन आज का बाज़ार वैसा नहीं है। आज लोग contract पर काम करते हैं, project-based जुड़ते हैं, app के ज़रिए delivery करते हैं। इसी बदलाव को पकड़ने के लिए सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार codes में समेटा, और gratuity अब Code on Social Security, 2020 के दायरे में आ गई।

Payment of Gratuity Act, 1972 से Code on Social Security, 2020 तक

पुराने Act की सबसे बड़ी कमी यह थी कि उसका ढाँचा सिर्फ़ स्थायी कर्मचारी को ध्यान में रखकर बना था। पाँच साल की शर्त इतनी सख़्त थी कि तीन-तीन साल के contract पर काम करने वाला व्यक्ति कभी eligible ही नहीं हो पाता था। कंपनियाँ भी यही करती थीं — चार साल ग्यारह महीने पर contract खत्म, और gratuity की देनदारी ही नहीं बनी।

नया Code इस खामी को दो तरफ़ से भरता है। पहला, यह fixed-term employees के लिए eligibility घटाता है। दूसरा, यह “wages” की एक ही definition सारे labour कानूनों में लागू करता है, जिससे payout का base बड़ा हो जाता है। यही दो बातें मिलकर gratuity new rules की असली कहानी बनाती हैं।

21 नवंबर 2025 — वह तारीख जिसने पूरा framework बदल दिया

सरकार ने चारों labour codes को 21 नवंबर 2025 से लागू करने की अधिसूचना जारी की। Ministry of Labour and Employment की 16 मार्च 2026 की Additional FAQs में यह भी साफ़ किया गया कि gratuity की गणना 21.11.2025 से ही नए framework के हिसाब से होगी, यानी यह prospectively लागू है — पुरानी तारीखों पर दोबारा हिसाब नहीं लगेगा।

यहाँ एक व्यावहारिक बात ध्यान रखिए। श्रम concurrent list का विषय है, इसलिए राज्यों को अपने rules अलग से अधिसूचित करने होते हैं। कई राज्यों में यह प्रक्रिया अभी चल रही है। नतीजा यह कि ज़मीन पर कुछ employers ने नया framework तुरंत अपना लिया और कुछ अब भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। कानून की स्थिति और दफ़्तर की practice के बीच का यही फ़ासला आज सबसे ज़्यादा विवाद पैदा कर रहा है।

Gratuity new rules के तहत पुराने Payment of Gratuity Act 1972 और नए Code on Social Security 2020 की तुलना
Image 1 ALT: Gratuity new rules के तहत पुराने Payment of Gratuity Act 1972 और नए Code on Social Security 2020 की तुलना

Gratuity New Rules 2026: 9 बड़े बदलाव एक टेबल में

नीचे दी गई टेबल पूरे बदलाव का नक़्शा है। इसके बाद हम हर अहम बिंदु को खोलकर देखेंगे।

# क्या बदला पहले अब (21 नवंबर 2025 से)
1 कानून Payment of Gratuity Act, 1972 Code on Social Security, 2020
2 Fixed-term employee की eligibility 5 साल 1 साल, pro-rata आधार पर
3 Permanent employee की eligibility 5 साल 5 साल — कोई बदलाव नहीं
4 Wages की definition हर कानून में अलग एक समान definition, सबमें लागू
5 Allowances की हद कोई सीमा नहीं 50% से ऊपर का हिस्सा wages में जुड़ेगा
6 Gig और platform workers कोई statutory सामाजिक सुरक्षा नहीं Section 113–114 में पहली बार शामिल
7 मृत्यु या disablement minimum service की शर्त नहीं शर्त अब भी नहीं — nominee को पूरा payout
8 Payment की समय-सीमा 30 दिन 30 दिन, देरी पर simple interest
9 Formula (Wages × 15 × साल) ÷ 26 वही formula, सिर्फ़ base बड़ा
Expert Insight: इस टेबल में सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया जाने वाला बिंदु नंबर 9 है। लोग formula ढूँढ़ते रह जाते हैं कि वह कहाँ बदला। असल में formula एक अक्षर भी नहीं बदला। बदली है उसमें डाली जाने वाली संख्या — यानी “wages”। और अक्सर असली फ़ायदा या नुकसान इसी एक संख्या में छिपा होता है।

Fixed-Term Employees को 1 साल में Gratuity — पूरा सच

यह वही बदलाव है जिसकी सबसे ज़्यादा चर्चा हुई और सबसे ज़्यादा ग़लतफ़हमी भी इसी पर है। Press Information Bureau की Code on Social Security factsheet के मुताबिक Section 53 के तहत fixed-term employees के लिए gratuity की शर्त पाँच साल से घटाकर एक साल कर दी गई है, और एक साल की continuous service पूरी होने पर gratuity proportionate आधार पर देय होगी।

ध्यान दीजिए — यह छूट सबके लिए नहीं है। Permanent यानी नियमित कर्मचारियों के लिए पाँच साल की शर्त ज्यों की त्यों बनी हुई है। अगर आप किसी company में regular payroll पर हैं और तीन साल में इस्तीफ़ा देते हैं, तो नए Code के बाद भी आपको gratuity नहीं मिलेगी।

कौन Fixed-Term Employee है और कौन नहीं

यहीं वह बारीकी है जो ज़्यादातर लेखों में छूट जाती है। Ministry की FAQ में साफ़ लिखा है कि fixed-term employment में वे कर्मचारी आते हैं जिन्हें employer ने सीधे नियुक्त किया है। Contractor के ज़रिए लगाया गया contract labour इस श्रेणी में नहीं आता।

यह अंतर व्यवहार में बहुत बड़ा है। मान लीजिए एक manufacturing unit में दो लोग एक ही मशीन पर, एक ही shift में काम करते हैं। पहला व्यक्ति company के letterhead पर दो साल के fixed-term contract पर है। दूसरा एक manpower agency के payroll पर है और agency ने उसे इस unit में तैनात किया है। नए नियम के तहत पहले व्यक्ति को एक साल पूरा होने पर pro-rata gratuity का अधिकार बनता है। दूसरे व्यक्ति का रिश्ता कानूनी रूप से agency से है, इसलिए यह विशेष छूट सीधे उस पर लागू नहीं होती।

सावधानी: अगर कोई employer सिर्फ़ gratuity की देनदारी टालने के लिए सीधे रखे गए staff को कागज़ों में contractor के payroll पर दिखा दे, तो यह जोखिम भरा रास्ता है। ऐसे मामलों में authority असली नियोक्ता-कर्मचारी संबंध देखती है, कागज़ का नाम नहीं।

Pro-rata calculation कैसे होगी

Pro-rata का मतलब है — जितनी service, उतनी gratuity। Fixed-term employee के लिए यह contract की अवधि के अनुपात में निकलती है और trigger इस्तीफ़ा नहीं, बल्कि contract की समाप्ति होती है।

मान लीजिए किसी FTE की wages ₹30,000 प्रति माह हैं और उसका 18 महीने का contract पूरा हुआ। formula वही रहेगा — (30,000 × 15 × 1.5) ÷ 26 = लगभग ₹25,962। अगर वही व्यक्ति पुराने ढाँचे में होता, तो उसे शून्य मिलता। यही इस बदलाव की असली ताक़त है — बड़ी रकम नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों तक पहुँच जिनके हाथ पहले कुछ नहीं आता था।

Gratuity eligibility flowchart hindi में — fixed-term employee, permanent employee और मृत्यु की स्थिति
Image 2 ALT: Gratuity eligibility flowchart hindi में — fixed-term employee, permanent employee और मृत्यु की स्थिति

50% Wage Rule आपकी Gratuity कैसे बढ़ाता है

अब उस बदलाव पर आते हैं जो हर employee को छूता है, चाहे वह fixed-term हो या permanent। PIB की factsheet के अनुसार Code में wages की परिभाषा में basic pay, dearness allowance और retaining allowance शामिल हैं। और अगर bonus, house rent allowance, conveyance allowance, overtime या commission जैसे भुगतान कुल remuneration के 50% से ज़्यादा हो जाएँ, तो अतिरिक्त रकम वापस wages में जोड़ दी जाएगी।

इसका सीधा नतीजा यह है कि wages की राशि बढ़ती है और gratuity, pension तथा leave salary जैसे लाभ — जो wages से जुड़े हैं — उनका मूल्य भी बढ़ जाता है।

Wages की नई definition — क्या जुड़ता है, क्या नहीं

Wages में शामिल Wages से बाहर (लेकिन 50% test में गिना जाएगा)
Basic pay House Rent Allowance (HRA)
Dearness Allowance (DA) Conveyance allowance
Retaining allowance Overtime allowance
50% सीमा से ऊपर का excess हिस्सा Commission और bonus

इस टेबल को पढ़ने का सही तरीका यह है — दायाँ कॉलम gratuity की गणना में सीधे नहीं जुड़ता, लेकिन यह तय करने में ज़रूर गिना जाता है कि आपका structure 50% की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं। अगर नहीं उतरता, तो उसका excess हिस्सा बायें कॉलम में चला आता है।

अब एक असली उदाहरण देखिए। मान लीजिए किसी employee की CTC ₹80,000 प्रति माह है और उसने 10 साल पूरे किए हैं। पुराने structure में basic सिर्फ़ 30% यानी ₹24,000 रखा गया था, बाक़ी सब allowances में। नए structure में wages को 50% यानी ₹40,000 पर लाना होगा।

50% wage rule का असर — gratuity new rules के तहत एक ही CTC पर पुरानी और नई gratuity की तुलना
Image 3 ALT: 50% wage rule का असर — gratuity new rules के तहत एक ही CTC पर पुरानी और नई gratuity की तुलना

यानी वही CTC, वही 10 साल, वही formula — लेकिन gratuity ₹1,38,462 से बढ़कर ₹2,30,769 हो गई। फ़र्क ₹92,307 का, करीब 67%।

Pro Tip: अपनी salary slip उठाइए और सिर्फ़ एक हिसाब लगाइए — Basic + DA को कुल gross से भाग दीजिए। अगर जवाब 0.5 से कम आता है, तो आपका structure अभी नए ढाँचे के अनुरूप नहीं है। यह HR से सवाल पूछने का सबसे ठोस आधार है।
अपनी असल रकम जानना चाहते हैं?

अनुमान लगाने के बजाय अपने आँकड़े डालकर देखिए — नया Gratuity Calculator (New Labour Codes) 50% wage rule और 1-साल वाली FTE eligibility, दोनों को ध्यान में रखकर गणना करता है और tax-free तथा taxable हिस्सा अलग-अलग दिखाता है।

Gratuity Calculator 2026 इस्तेमाल करें

Gratuity Calculation — Step by Step और तीन असली मिसालें

गणना का तरीका पाँच कदमों में समझिए।

  1. Wages तय कीजिए। आख़िरी महीने का Basic + DA + retaining allowance लीजिए। HRA, conveyance और overtime इसमें नहीं आते।
  2. 50% की जाँच कीजिए। अगर allowances कुल remuneration के आधे से ज़्यादा हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा wages में जोड़िए।
  3. पूरे साल गिनिए। छह महीने से ज़्यादा का हिस्सा एक पूरा साल माना जाता है। 10 साल 7 महीने = 11 साल।
  4. Formula लगाइए। Gratuity = (Wages × 15 × पूरे साल) ÷ 26।
  5. Tax-free हिस्सा निकालिए। ₹20 लाख की सीमा, वास्तविक gratuity और formula वाली रकम — तीनों में से सबसे कम रकम कर-मुक्त होगी।

यहाँ 15 का मतलब है हर पूरे साल के बदले आधे महीने यानी 15 दिन की wages, और 26 का मतलब है महीने में काम के औसत दिन, क्योंकि साप्ताहिक अवकाश हटा दिए जाते हैं।

मिसाल 1 — रमेश, permanent employee, 11 साल की service

रमेश एक logistics company में हैं। restructuring के बाद उनकी wages (Basic + DA) ₹42,000 हो गई हैं। उन्होंने 10 साल 8 महीने काम किया, जो गिनती में 11 साल माना जाएगा।

Gratuity = (42,000 × 15 × 11) ÷ 26 = ₹2,66,538

यह पूरी रकम ₹20 लाख की सीमा से काफ़ी नीचे है, इसलिए इस पर कोई tax नहीं बनेगा।

मिसाल 2 — प्रिया, fixed-term employee, 2 साल का contract

प्रिया एक ed-tech company में दो साल के सीधे fixed-term contract पर थीं। wages ₹35,000। contract की अवधि पूरी होने पर वे बाहर हुईं — इस्तीफ़ा नहीं दिया।

Gratuity = (35,000 × 15 × 2) ÷ 26 = ₹40,385

पुराने Act में उन्हें एक रुपया नहीं मिलता, क्योंकि पाँच साल पूरे ही नहीं हुए थे। यही gratuity new rules का सबसे ठोस असर है।

मिसाल 3 — इमरान, 4 साल 8 महीने पर इस्तीफ़ा

इमरान ने पाँचवें साल में 250 दिन काम किया और फिर नौकरी बदल ली। company ने gratuity देने से मना कर दिया।

यहाँ स्थिति दो-टूक नहीं है। कई High Courts ने माना है कि पाँचवें साल में 240 दिन से ज़्यादा की service को पूरा साल गिना जा सकता है। लेकिन यह कोई स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं है — employer मना करे तो competent authority के सामने दावा करना पड़ता है। इसलिए इस्तीफ़े की तारीख तय करने से पहले यह गणना कर लेना समझदारी है।

Nomination — वह एक फ़ॉर्म जो सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ होता है

Gratuity की पूरी चर्चा में एक कागज़ ऐसा है जिस पर लगभग कोई ध्यान नहीं देता — nomination। नौकरी में एक साल पूरा होते ही कर्मचारी को अपने परिवार के सदस्य के नाम nomination दर्ज कराना होता है। ज़्यादातर लोग joining के समय फ़ाइल में कुछ फ़ॉर्म भरकर भूल जाते हैं और फिर सालों तक उसे अपडेट नहीं करते।

इसका नतीजा दुखद स्थितियों में सामने आता है। सेवा के दौरान मृत्यु होने पर gratuity पूरी तरह देय होती है और उस पर कोई minimum service की शर्त भी नहीं लगती। लेकिन अगर nomination पुराना है — मान लीजिए शादी से पहले का, या ऐसे व्यक्ति के नाम जो अब जीवित नहीं — तो रकम अटक जाती है और परिवार को उसी वक़्त कागज़ी लड़ाई लड़नी पड़ती है जब उसकी सबसे कम गुंजाइश होती है।

व्यावहारिक नियम सीधा है। शादी, तलाक, बच्चे का जन्म या माता-पिता के निधन — इनमें से कोई भी घटना हो, तो nomination दोबारा देखिए। यह पाँच मिनट का काम है और इसकी एक प्रति अपने पास भी रखिए, सिर्फ़ HR की फ़ाइल पर भरोसा मत कीजिए।

Pro Tip: nomination की स्वीकृत प्रति माँगकर अपने निजी ईमेल पर सुरक्षित रख लीजिए। company बदलने, HR system बदलने या records गुम होने की स्थिति में यही एक प्रति निर्णायक साबित होती है।

Gratuity, PF और Full & Final Settlement — किसका नियम क्या

नौकरी छोड़ते समय तीन अलग-अलग रकमें बनती हैं और लोग अक्सर तीनों को एक ही “full and final” मानकर उलझ जाते हैं। इन्हें अलग-अलग समझना ज़रूरी है, क्योंकि इनके नियम, समय-सीमा और कर-व्यवस्था तीनों अलग हैं।

मद किस आधार पर समय-सीमा कर-व्यवस्था
बकाया salary और leave encashment अंतिम महीने का हिसाब exit के बाद बहुत कम समय — Code on Wages के तहत दो कार्य दिवस salary के रूप में taxable, leave encashment पर अलग छूट
Provident Fund कर्मचारी + नियोक्ता का अंशदान transfer या withdrawal की प्रक्रिया पर निर्भर शर्तें पूरी होने पर छूट
Gratuity service के पूरे साल और wages देय होने से 30 दिन ₹20 लाख तक की जीवन भर की छूट

ध्यान देने वाली बात यह है कि gratuity की तीस दिन वाली घड़ी बाक़ी बकाया राशियों से अलग चलती है। कई employers पूरी F&F को एक ही process मानकर सब कुछ रोक लेते हैं और फिर तीस दिन की सीमा चुपचाप निकल जाती है। कर्मचारी के लिए इसका मतलब यह है कि अगर बाक़ी settlement में देरी हो रही है, तब भी gratuity के लिए अलग से लिखित माँग करना समझदारी है।

Employer के नज़रिए से देखें तो यह cash flow की योजना का मामला है। एक साथ कई senior कर्मचारियों के बाहर निकलने पर gratuity की देनदारी अचानक बड़ी बन जाती है — और 50% wage rule के बाद यह पहले से ऊँची होती है। इसीलिए provisioning को साल में एक बार नहीं, बल्कि नियमित रूप से देखना चाहिए।

Expert Insight: छोटी companies में सबसे आम गलती यह है कि gratuity के लिए कोई अलग fund या provision रखा ही नहीं जाता — जब कोई निकलता है तब चालू खाते से भुगतान किया जाता है। दस-बारह साल पुरानी टीम में यह तरीका किसी एक महीने में भारी पड़ सकता है।

Gig और Platform Workers — Gratuity नहीं, लेकिन Social Security ज़रूर

नए Code की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जिस बात का ज़िक्र होता है, वह है gig और platform workers को पहली बार कानूनी दायरे में लाना। PIB की factsheet के मुताबिक Sections 113 और 114 के तहत असंगठित, gig और platform workers को सामाजिक सुरक्षा लाभ देश में पहली बार मिले हैं, और aggregator की परिभाषा भी Code में जोड़ी गई है।

लेकिन यहाँ एक बारीकी है जिसे कई जगह ग़लत बताया जा रहा है। gig workers को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाना और उन्हें gratuity का अधिकार दे देना — ये दो अलग बातें हैं। gratuity का ढाँचा नियोक्ता-कर्मचारी संबंध पर टिका है। app के ज़रिए काम करने वाले delivery partner या cab driver का रिश्ता कानूनी रूप से पारंपरिक employment जैसा नहीं है, इसलिए उन पर वही 15/26 वाला formula अपने आप लागू नहीं होता।

उनके लिए जो व्यवस्था बनी है वह अलग किस्म की है — aggregators से अंशदान लेकर एक सामाजिक सुरक्षा कोष बनाना, जिससे जीवन और अपंगता बीमा, स्वास्थ्य तथा मातृत्व लाभ जैसी योजनाएँ चलें। Ministry की FAQ के अनुसार aggregators द्वारा दिया जाने वाला अंशदान केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी और यह राशि केंद्र सरकार के सामाजिक सुरक्षा कोष में जमा होगी।

इसलिए अगर आप किसी platform पर काम करते हैं, तो सही उम्मीद यह रखिए — नौकरी छोड़ने पर एकमुश्त gratuity नहीं, बल्कि पंजीकरण के ज़रिए योजनाओं तक पहुँच। और पंजीकरण ही पहली शर्त है; बिना पंजीकरण के कोई भी योजना काग़ज़ पर ही रह जाती है।

ग़लतफ़हमी से बचिए: “gig workers को अब gratuity मिलेगी” वाली बात कई जगह चल रही है। Code उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाता है — gratuity के formula के दायरे में नहीं।

Take-Home Salary पर असर — फ़ायदा है या नुकसान

यह सवाल हर कर्मचारी के मन में आता है और इसका जवाब ईमानदारी से दो हिस्सों में देना पड़ता है।

छोटी अवधि में, अगर आपका employer structure बदलकर Basic + DA को 50% तक लाता है, तो PF का आधार भी बढ़ जाता है। PF की दर वही रहती है, लेकिन आधार बड़ा होने से मासिक कटौती बढ़ सकती है और हाथ में आने वाली रकम कुछ कम हो सकती है। यह वह हिस्सा है जो लोगों को तुरंत दिखता है और जिस पर सबसे ज़्यादा शिकायत होती है।

लंबी अवधि में तस्वीर उलट जाती है। वही बढ़ा हुआ आधार आपके PF corpus को बड़ा करता है और gratuity की रकम को भी। यानी पैसा गया नहीं है — उसका रूप बदल गया है। मासिक नक़दी से हटकर वह retirement के खाते में चला गया है।

किसके लिए यह ज़्यादा मायने रखता है? जिनकी salary में allowances का हिस्सा असामान्य रूप से ऊँचा रखा गया था, उनके लिए बदलाव सबसे बड़ा होगा। जिनका structure पहले से संतुलित था — यानी Basic पहले ही 45–50% के आसपास — उनके लिए फ़र्क मामूली रहेगा।

Pro Tip: अगर restructuring के बाद आपकी take-home घटी है, तो सिर्फ़ घटी हुई रकम मत देखिए। यह भी देखिए कि PF और gratuity में सालाना कितना जुड़ रहा है। दोनों को जोड़कर तुलना करने पर अक्सर पता चलता है कि कुल मुआवज़ा घटा नहीं है।

Gratuity पर Tax — Income-tax Act, 2025 के तहत नियम

रकम मिल जाना एक बात है, उस पर tax कितना बनेगा यह दूसरी। 1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act, 2025 लागू हो चुका है और exempt income वाले प्रावधान अब पुराने Section 10 की जगह नए ढाँचे में — Section 11 और उससे जुड़ी Schedules में — रखे गए हैं। राहत की बात यह है कि gratuity पर छूट का सार वही रहा है जो पहले Section 10(10) में था।

श्रेणी कितनी छूट
सरकारी कर्मचारी (केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय, रक्षा) पूरी gratuity कर-मुक्त, कोई ऊपरी सीमा नहीं
निजी क्षेत्र, Gratuity कानून के दायरे में इनमें से सबसे कम — वास्तविक gratuity, ₹20 लाख, या (15 ÷ 26) × आख़िरी wages × साल
निजी क्षेत्र, कानून के दायरे से बाहर इनमें से सबसे कम — वास्तविक gratuity, ₹20 लाख, या आख़िरी 10 महीने की औसत salary का आधा × साल
मृत्यु या स्थायी अपंगता पूरी रकम कर-मुक्त, कोई सीमा नहीं
Service के दौरान मिली gratuity पूरी तरह taxable

₹20 लाख की सीमा को लोग अक्सर ग़लत समझते हैं

सबसे आम भूल यह है कि लोग इसे “हर नौकरी पर ₹20 लाख” समझ लेते हैं। ऐसा नहीं है। यह जीवन भर की कुल सीमा है। अगर आपने पहले किसी employer से ₹7 लाख की gratuity पर छूट ले ली है, तो आगे सिर्फ़ ₹13 लाख की गुंजाइश बची है।

दूसरी भूल ITR भरते समय होती है। कर-मुक्त हिस्सा भी ITR में exempt income के रूप में दिखाना होता है, छिपाना नहीं। आपका employer इसे Form 16 में दर्ज करता है और वही ब्योरा income tax portal पर आपके AIS में दिखता है। मेल न खाने पर notice आने की गुंजाइश बन जाती है। नए और पुराने ढाँचे की तुलना के लिए हमारी Income Tax Guide देख सकते हैं।

Pro Tip: जिस वित्त वर्ष में gratuity मिलती है, उस साल आपकी कुल आय अचानक ऊपर चली जाती है। अगर रकम बड़ी है और उसका कुछ हिस्सा taxable बन रहा है, तो advance tax की किस्त का ध्यान रखिए, वरना ब्याज लग सकता है।

Employer Gratuity न दे तो क्या करें — Claim का पूरा Process

कानून यहाँ कर्मचारी के पक्ष में साफ़ खड़ा है। Code की Section 56 के अनुसार gratuity देय होते ही employer को ख़ुद उसकी राशि तय करके सूचित करना होता है — भले ही कर्मचारी ने कोई आवेदन दिया हो या नहीं। और भुगतान देय होने की तारीख से तीस दिन के भीतर करना होता है।

अगर तीस दिन में भुगतान नहीं होता, तो employer को देय तिथि से भुगतान की तिथि तक simple interest देना पड़ता है। यह ब्याज दर केंद्र सरकार द्वारा दीर्घकालिक जमा के लिए अधिसूचित दर से ज़्यादा नहीं हो सकती। एक अपवाद है — अगर देरी कर्मचारी की अपनी ग़लती से हुई हो और employer ने इसके लिए authority से लिखित अनुमति ले रखी हो, तो ब्याज देय नहीं होता।

व्यावहारिक कदम इस क्रम में उठाइए:

  1. लिखित आवेदन दीजिए। नौकरी छोड़ने के बाद employer को औपचारिक आवेदन भेजिए। practice में अब भी पुराने Form I का प्रारूप चलन में है, क्योंकि कई राज्यों ने अपने नए rules अधिसूचित नहीं किए हैं। ईमेल से भेजिए ताकि तारीख का प्रमाण रहे।
  2. पावती और गणना माँगिए। employer को राशि की गणना बताकर सूचित करना चाहिए। पंद्रह दिन में कोई जवाब न मिले तो चुप मत बैठिए।
  3. Competent Authority के पास जाइए। संबंधित क्षेत्र के श्रम अधिकारी के पास दावा दायर कीजिए। यही वह प्राधिकारी है जो राशि तय कर सकता है और भुगतान का आदेश दे सकता है।
  4. सुनवाई में दस्तावेज़ ले जाइए। appointment letter, relieving letter, आख़िरी तीन salary slips, और service की अवधि का प्रमाण — यही चार चीज़ें ज़्यादातर मामलों में निर्णायक होती हैं।
  5. आदेश के बाद वसूली। आदेश के बावजूद भुगतान न हो तो राशि की वसूली की प्रक्रिया उपलब्ध है, और Code में गैर-भुगतान के लिए दंडात्मक प्रावधान भी हैं।
ध्यान दें: gratuity रोकने का अधिकार employer के पास बहुत सीमित है। सामान्य विवाद, notice period पूरा न करना, या “handover ठीक से नहीं हुआ” — ये अपने आप में gratuity रोकने का कानूनी आधार नहीं हैं। रोकने के लिए गंभीर कदाचार से जुड़ी विशिष्ट परिस्थितियाँ और उचित प्रक्रिया दोनों ज़रूरी हैं।

Employers के लिए Gratuity New Rules Compliance Checklist

अगर आप छोटी या मँझोली company चलाते हैं, तो gratuity new rules सिर्फ़ HR का विषय नहीं — यह सीधे आपके cash flow और balance sheet का विषय है। दो बदलाव एक साथ हुए हैं: दायरा बढ़ा है और आधार भी बढ़ा है। दोनों मिलकर provision को काफ़ी ऊपर ले जाते हैं।

क्या करना है क्यों ज़रूरी है
Salary structure की समीक्षा Basic + DA कुल remuneration के 50% से कम न रह जाए
सभी FTE contracts की सूची बनाना एक साल पूरा होने की तारीख़ें पहले से पता हों
सीधे रखे गए और contractor के staff को अलग-अलग दर्ज करना eligibility इसी वर्गीकरण पर टिकी है
Gratuity provision का दोबारा आकलन पुराना actuarial अनुमान अब कम पड़ सकता है
Exit process में 30-दिन की घड़ी जोड़ना देरी पर ब्याज की देनदारी बनती है
Nomination records अपडेट रखना मृत्यु की स्थिति में भुगतान अटकता नहीं
राज्य के rules पर नज़र प्रक्रिया और forms राज्य स्तर पर तय होते हैं

एक बात जो अक्सर देर से समझ आती है — PF और gratuity दोनों का आधार एक ही wages की definition है। इसलिए structure बदलते ही दोनों की देनदारी साथ-साथ बढ़ती है। इसे अलग-अलग गिनने की भूल मत कीजिए। चारों codes के व्यापक असर के लिए हमारी New Labour Codes 2026 गाइड पढ़िए।

Gratuity new rules 2026 infographic hindi — 7 ज़रूरी बातें employees और employers के लिए
Image 4 ALT: Gratuity new rules 2026 infographic hindi — 7 ज़रूरी बातें employees और employers के लिए

7 आम गलतफ़हमियाँ जो महँगी पड़ती हैं

1. “अब सबको एक साल में gratuity मिलेगी।” नहीं। यह छूट सिर्फ़ fixed-term employees के लिए है। नियमित कर्मचारियों के लिए पाँच साल की शर्त बनी हुई है।

2. “Contractor के through काम करने वालों को भी एक साल में मिलेगी।” Ministry की FAQ इस पर स्पष्ट है — fixed-term employment में सीधे नियुक्त कर्मचारी आते हैं।

3. “Formula बदल गया है।” formula वही है। बदली है wages की परिभाषा, जिससे formula में डाली जाने वाली संख्या बदल जाती है।

4. “CTC वही है तो gratuity भी वही रहेगी।” यही सबसे महँगी भूल है। ऊपर की मिसाल में CTC एक रुपया नहीं बदला, फिर भी gratuity 67% बढ़ गई।

5. “हर नौकरी पर ₹20 लाख की छूट मिलेगी।” यह जीवन भर की कुल सीमा है, हर employer पर अलग-अलग नहीं।

6. “इस्तीफ़ा दिया तो gratuity नहीं मिलती।” पाँच साल पूरे हैं तो इस्तीफ़े पर भी उतनी ही देय है जितनी retirement पर।

7. “Company ने नया structure नहीं अपनाया, मतलब कानून लागू नहीं हुआ।” कानून लागू होना और employer का उसे अपनाना दो अलग बातें हैं। employer का देर करना आपके अधिकार को ख़त्म नहीं करता।

8. “gig workers को भी अब gratuity मिलेगी।” उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा मिला है, gratuity का formula नहीं। दोनों अलग व्यवस्थाएँ हैं।

9. “Notice period का समय service में नहीं गिना जाता।” अगर आप notice period में वास्तव में काम कर रहे हैं और payroll पर हैं, तो वह अवधि service का हिस्सा है। कई बार यही कुछ दिन 240 दिन की गिनती में निर्णायक साबित होते हैं।

10. “gratuity पर employer TDS काट ही नहीं सकता।” जो हिस्सा छूट की सीमा से बाहर है, वह salary के रूप में taxable है और उस पर TDS बनता है। छूट पूरी रकम पर नहीं, सीमा तक ही है।

Expert Insight: जिन कर्मचारियों ने नवंबर 2025 के आसपास नौकरी बदली, उनके मामले सबसे उलझे हुए हैं। ऐसे मामलों में सेवा का कुछ हिस्सा पुरानी व्यवस्था में और कुछ नई में पड़ता है। ऐसी स्थिति में अपने relieving letter और आख़िरी salary slips सँभालकर रखिए — विवाद होने पर यही दस्तावेज़ काम आते हैं।

Key Takeaways

  • Code on Social Security, 2020 — 21 नवंबर 2025 से लागू; Payment of Gratuity Act, 1972 की जगह।
  • Fixed-term employees को अब एक साल की service पर pro-rata gratuity, Section 53 के तहत।
  • Permanent employees के लिए पाँच साल की शर्त पहले जैसी ही।
  • Contractor के ज़रिए लगे contract labour पर एक साल वाली छूट सीधे लागू नहीं।
  • Allowances 50% से ज़्यादा हों तो excess हिस्सा wages में जुड़ता है — payout बढ़ता है।
  • Formula वही: (Wages × 15 × पूरे साल) ÷ 26।
  • ₹20 लाख की छूट जीवन भर की कुल सीमा है; सरकारी कर्मचारियों की gratuity पूरी exempt।
  • भुगतान 30 दिन में; देरी पर simple interest देय।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या अब सभी employees को 1 साल में gratuity मिलेगी?

नहीं। 1 साल की शर्त सिर्फ़ fixed-term employees पर लागू होती है। Permanent employees के लिए 5 साल की continuous service की शर्त पहले जैसी ही है।

Gratuity new rules कब से लागू हुए हैं?

Code on Social Security, 2020 को 21 नवंबर 2025 से लागू किया गया। Ministry of Labour and Employment की FAQ के मुताबिक gratuity की गणना इसी तारीख से नए framework के हिसाब से होगी।

Contractor के ज़रिए रखे गए workers को 1 साल वाला fixed-term फ़ायदा मिलेगा?

नहीं। Ministry की FAQ साफ़ कहती है कि fixed-term employment में वही कर्मचारी आते हैं जिन्हें employer ने सीधे रखा है। Contractor के through लगे contract labour इस श्रेणी में नहीं आते।

Gratuity का formula क्या नए rules में बदल गया है?

formula नहीं बदला। यह अब भी (Wages × 15 × पूरे साल) ÷ 26 है। बदलाव सिर्फ़ इस बात में है कि Wages में क्या-क्या गिना जाएगा।

Gratuity कितनी tax-free है?

private sector employees के लिए ₹20 लाख तक की gratuity tax-free है और यह lifetime limit है, यानी सभी employers से मिली gratuity जोड़कर देखी जाती है। सरकारी कर्मचारियों की gratuity पूरी तरह exempt है।

4 साल 8 महीने पर gratuity मिलती है या नहीं?

कई High Courts ने माना है कि पाँचवें साल में 240 दिन से ज़्यादा काम करने पर service को 5 साल के बराबर माना जा सकता है। लेकिन यह अभी भी case-specific है और employer मना कर दे तो competent authority के पास जाना पड़ता है।

Employer 30 दिन में gratuity न दे तो क्या होगा?

Section 56 के तहत employer को देरी की पूरी अवधि पर simple interest देना होता है। ब्याज की दर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित दर से ज़्यादा नहीं हो सकती।

क्या resignation पर भी gratuity मिलती है?

हाँ। अगर आपने 5 साल की continuous service पूरी कर ली है तो resignation पर भी gratuity उतनी ही देय है जितनी retirement पर। gratuity कोई इनाम नहीं, statutory अधिकार है।

निष्कर्ष

Gratuity new rules को एक वाक्य में समेटा जाए तो यह कहा जा सकता है — दायरा बढ़ा है और आधार भी। fixed-term staff के लिए दरवाज़ा एक साल पर खुल गया, और wages की नई परिभाषा ने हर उस कर्मचारी की रकम बढ़ा दी जिसकी salary में allowances का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा था।

लेकिन कानून अपने आप किसी के खाते में पैसा नहीं डालता। जो लोग अपनी salary slip पढ़ना जानते हैं, service के साल सही गिनते हैं, और समय पर लिखित दावा करते हैं — फ़ायदा उन्हीं तक पहुँचता है। इसलिए आज ही दो काम कीजिए: अपनी Basic + DA का अनुपात जाँचिए, और अपनी service की सही अवधि निकालिए।

अनुमान लगाने के बजाय ठोस आँकड़ा चाहिए तो हमारे मुफ़्त Gratuity Calculator में अपनी wages और service डालकर देखिए, या सभी मुफ़्त tax calculators की सूची देखिए। कोई सवाल रह जाए तो हमसे संपर्क कीजिए

यह सामग्री केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है और यह किसी भी प्रकार की पेशेवर, कर, कानूनी या निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निर्णय से पहले योग्य पेशेवर से परामर्श करें। दरें, धाराएँ और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं — कृपया labour.gov.in और incometax.gov.in पर नवीनतम स्थिति देखें।

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